समय भी काफी अजीब होता है सालों तक रुला कर बस एक पल को चुटकी भर खुशियां देता है कितना सुहाना था वो बचपन हमारा ना आगे की चिन्ता थी ना ही सरपे काम का बोझ बस पुरे दिन खेला करते थे और दोस्तों के फ़िज़ूल के नखरे झेला करते थे अब तो नजाने कितने साल हुए दोस्तों से एक साथ मिलने को बेहाल हुए बचपन की अब बस यादें रह गयीं कुछ खट्टी कुछ मीठी सी भूल गए है अबतो सारी बदमाशिया जो हमने की मिलकर फिरसे याद करेंगे ऊपर वाले से फर्याद करेंगे साथ हो उनका सारी ज़िन्दगी चूतिये ही सही पर है तो सारे अपने ही |
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