ये उन दिनो की बात है
जब हम छोटे से हुआ करते थे
हर शाम गुस्से मे लड़ कर
सुबेह होते ही
सब कुछ भूल कर
साथ स्कुल जाया करते थे
टेक्नोलॉजी से कोसों दूर उस जमाने मे
हम खुलके हँस लिया करते थे
हर दिन लड़ने के बावजूद
हम एकदुसरे को बचाने
हर मुस्किल में उनके साथ
हुआ करते थे।
जब हम छोटे से हुआ करते थे
हर शाम गुस्से मे लड़ कर
सुबेह होते ही
सब कुछ भूल कर
साथ स्कुल जाया करते थे
टेक्नोलॉजी से कोसों दूर उस जमाने मे
हम खुलके हँस लिया करते थे
हर दिन लड़ने के बावजूद
हम एकदुसरे को बचाने
हर मुस्किल में उनके साथ
हुआ करते थे।
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