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फूट फूट के रोना है

जब हम काफी छोटे थे 
उनकी गोद में सोते थे 

फिर हम थोड़े बड़े हुए 
अपने पैरों पे चलने लगे 

हर दिन भैया और दी से लड़ते थे
आखिर में अम्मी की गोद  मे जा कर रोते थे

धीरे धीरे हम बड़े हुए 
अपने पैरों पे खड़े हुए 

एक रोज़ हम थोड़े आगे बढ़े 
घर छोड़ने को मजबूर हुए 

आज हमें घर छोड़े कई साल हुए 
जी रहे हम दिल में न जाने कितने मलाल लिए 

अब हम हर रोज़ काम करते है
पर अपनों से दूर होने से डरते है 

अब जाके हमें समझ आया 
वो कितनी मुश्किलें सहते थे 
खुद परेशान होकर भी 
हमारी जरूरतें पूरी किया करते थे 

अब हम पुरे थक चुके है 
फिरसे अम्मी की गोद में सोना है 
अब्बा को जोर से गले लगा कर फूट फूट के रोना है 
फूट फूट के रोना है........

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