सर उठा कर जी सके वो
इतनी मेहनत कर रहा
आसमान की बुलंदियों को
चूम कर भी ना थका
एक पल को नजर जो फेरी
धरती की ओर वो फिसल गया
जान लगा दी समय गंवाया
सन्तुष तो वो हो ना सका
खुशी के इतने समीप होकर भी
उस ओर वो कभी गया नहीं
मृत्यु के जब समिप पोहचा तो
अफसोस के अलावा कुछ ना मीला
जीने की उम्मीद मैं बैठा
जब कुछभी बसमे रहा नही |
Good 👍
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