संकट और चुनौतियों से भरे इस समय में
घर से हम है कोसो दुर फंसे
हर दिन बस अब उनसे मिलने की
राह हम है देख रहे
एक वो दिन थे और एक आज है
उनसे मिलने को हम तरस रहे
हर दिन अब बस उस पल के इन्तजार में
आंसू हमारे बरस रहे
नजने क्या क्या हम है अब बस है जी रहे
अपनी आंखों में बस एक दिन घर लोटने
की उम्मीद लिए
पागल थे हम बचपन में
बड़े होने के सपने देखा करते थे
अब जो हम बड़े हुए है
उन सुनहरे दिनों की यादों में जिया करते है
आज तक हम ये समझ ना पाए
आपको अम्मी कहे या मां
दोनों का मतलब तो एक ही है ना
आप गीता परहो या क़ुरान
अब बस घर लौट जाऊं बस
आपके हांथो से खाना है
सारी चिंता भूलकरके
बचपन की तरेह आपकी गोद में
सर रख के चैन की नींद सो जाना है।
💗touching 😇😇
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